मिल्खा सिंह की जीवनी – Milkha singh biography

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Milkha singh biography in hindi

Milkha singh biography

मिल्खा सिंह के बारे में – Milkha singh biography in hindi

पूरा नाम (Full Name)मिल्खा सिंह
उपनाम (Nick name)“उड़न सीख” Flying Sikh
जन्म की तारीख (Date of Birth)20 नवम्बर 1929
जन्म स्थान (Birth Place)गोविंदपुर  (पाकिस्तान)

Milkha singh biography मिल्खा सिंह भारत के एक प्रसिद्ध धावक हैं। इनका जन्म 20 नवम्बर 1929 को गोविंदपुर  (पाकिस्तान)  में हुआ था, ये एक बहुत अच्छे धावक हैं, हर हिंदुस्तानी इनको अच्छी तरह से जानता हैं, ये एक राठौड़ राजपूत सिक्ख परिवार से सम्बंधित हैं। इन्होंने रोम के 1960 ग्रीष्म ओलम्पिक खेलो तथा टोक्यो के 1964 ग्रीष्म ओलंपिक खेलों में अपने देश भारत का प्रतिनिधित्व किया था दोस्तो मिल्खा सिंह नें अपने जीवन में बहुत संघर्ष किया। आज हम आपको इनकी जीवनी के बारे में बतायंगे इस लेख को शुरू से लेकर last तक पढ़े इनके जीवन की  बाते पढ़कर आपके मन प्रेरणा से उठ पड़ेगा।

प्रारंभिक जीवन –

दोस्तो मिल्खा सिंह का जन्म 20 नवम्बर 1929 को गोविंदपुर  (पाकिस्तान)  में हुआ था दरअसल जब तक भारत अंग्रेजो का गुलाम था, तो जहाँ मिल्खा सिंह का जन्म हुआ था वो हिस्सा पाकिस्तान में चला गया था। दोस्तो बताया जाता हैं, की मिल्खा सिंह अपने माँ बाप की पंद्रह संतानो में से एक थे, उनके भाई बहन की मृत्यु बचपन मे ही हो गयी थी तो ये अपने माँ बाप के अकेले थे

जब भारत आजाद हुआ था , तो बहुत दंगे हुए थे, और भारत के दो टुकड़े हो गए और जहाँ मिल्खा सिंह का परिवार रहता था, वो स्थान पाकिस्तान में चला गया, उस समय ही मिल्खा सिंह ने भारत मे हुए सामुदायिक दंगो में अपने माँ बाप को दंगे में खो दिया और ये अकेले हो गए, ये सिर्फ उस वक्त 12 साल के थे,

मिल्खा सिंह को भारत से बहुत लगाव हैं, इसलिए वो पाकिस्तान से शरणार्थी के रूप में भारत में आ गए। और जब इनका भारत मे कुछ भी नही बचा था इसलिए वे कुछ दिन अपनी शादी सुदा बहन के यहाँ रहे।

और कुछ समय ये शरणार्थी शिविर में भी रहे जो कि भारत सरकार द्वारा शरणार्थी को दिए गए थे। इसके बाद ये दिल्ली के शाहदरा में भी रहे, इन्हें रहने के लिए भी बहुत बहुत भटकना पड़ा, इनका जीवन ये बहुत बड़ा संकट था,

इसके बाद इनके बड़े भाई मलखान सिंह के कहने पर इन्होंने सेना में भर्ती होने का मन बनाया लेकिन भारतीय सेना ने इन्हें तीन बार रिजेक्ट किया फिर चौथी बार मे ये भारतीय सेना में शामिल हो गए इनका भारतीय सेना में चयन इंजिनीरिंग विभाग में हुआ था

मिल्खा सिंह की वैवाहिक स्थिति Milkha singh personal life


मिल्खा सिंह की मुलाकात निर्मल कौर से हुई , ये सन 1955 में भारतीय महिका वॉलीबॉल टीम की कप्तान थी, इसी मुलाकात को मिल्खा सिंह और निर्मल कौर ने शादी में बदल लिया जी हाँ इन्होंने सन 1962 में शादी की और इनके 4 बच्चे भी हैं। जिनमे एक लड़का जिसका नाम जीव मिल्खा सिंह है, व इनकी 3 बेटी हैं।

इनके पुत्र जीव मिल्खा गोल्फ के खिलाड़ी हैं। ये भारत के पहले सबसे अच्छे गोल्फर हैं, 2006 में इन्होंने 100 गोल्फरों ने आपनी जगह बनाई थी।

मिल्खा सिंह जी ने 1999 में 7 साल के एक लड़के को गोद लिया था जिसका नाम हवलदार विक्रम सिंह था , जो कि टाइगर हिल के युद्ध मे शहीद हो गए थे।

धावक के रूप ने मिल्खा सिंह

मिल्खा सिंह को बचपन से ही खेलकूद में बहुत रुचि थीं, जब ये बचपन मे अपने स्कूल जाते थे तो ये दौड़कर जाते थे और दौड़कर आते थे

सेना में भर्ती होने के बाद इन्होंने कड़ी मेहनत की मिल्खा सिंह ने एक बार बताया था कि ट्रैनिंग के दौरान मिल्खा सिंह को मुंह और पेशाब से खून तक आ जाता था अब आप सोच सकते हैं, कितनी कठिन मेहनत की होगी,

इन्होंने 200Mt और 400Mt में अपने आप को काबिल बनाया और कई प्रतियोगिताओं में सफलता भी प्राप्त की और इन्होंने 1956 में हुए मेलबोन्न के ओलपिंक खेलो में 200 मीटर और 400 मीटर में भारत का प्रतिनिधित्व किया इनको उस वक्त अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इतना अनुभव नही था जिस कारण ये असफल हो गए।

लेकिन इसके बाद 400 मीटर के धावक चार्ल्स जैकिंस से इनकी मुलाकात हुई और इन्होंने उनसे मिलने के बाद एक दृढ़ संकल्प ले लिया और नए तरीके से ट्रेनिंग की।

और इसके बाद सन 1958 में कटक में हुए राष्ट्रीय खेलो में 200 मीटर और 400 मीटर में राष्ट्रीय कीर्तिमान का गौरव प्राप्त किया और अपने नाम एक रिकॉर्ड खड़ा कर दिया जो कि 47.5 सेकण्ड्स में 400 मीटर की दौड़ करकर बना दिया।

इसके बाद जापान के टोक्यो में हुए एशियाई खेलो ने 200 मीटर और 400 मीटर  तक रिकॉर्ड तोड़कर विजय प्राप्त की। इसके बाद सन 1958 में ही ब्रिटेन में हुए राष्ट्रमण्डल खेलो में भी स्वर्ण पदक जीता।

मिल्खा सिंह की (JCO) पद पर नियुक्ति

सन 1958 में के खेलों के अच्छे प्रदर्शन के कारण मिल्खा सिंह को Junior Commissioned Officer (JCO) के तौर पर प्रमोशन कर दिया इसके उपरांत मिल्खा सिंह जी को पंजाब के शिक्षा विभाग में खेल निदेशक के पड़ पर नियुक्त किये गए , इस पद से ये सन 1998 में रिटायर्ड हुए

रोम ओलंपिक खेल, 1960

रोम ओलंपिक खेल शुरू होने से पहले मिल्खा सिंह अपने जीवन के बहुत अच्छे मुकाम पर थे और सभी को यही विस्वास था कि इस बार मिल्खा सिंह को जरूर जीतेंगे मगर ऐसा हुआ नही, आपको बता दे मिल्खा सिंह ने 400 मीटर की दौड़ में 40 साल का रिकॉर्ड तो तोड़ा था उनका 45.73 सेकंड का ये रिकॉर्ड अगले 40 साल तक नेशनल रिकॉर्ड रहा। लेकिन दुर्भाग्यवश ये इस रेस को नही जीते और चौथा स्थान पर ही रह गए, दरअसल इस दौड़ में मिल्खा सिंह की एक बहुत बड़ी भूल थी जिसका उनको आज तक पछतावा होता हैं, इस दौड़ में जब वे दौड़ रहे तो 250 मीटर की दौड़ तक आगे रहे लेकिन उन्होंने इसमे दौड़ते वक्त पीछे मुड़ के देख लिया जिस कारण ये चौथे स्थान पर रह गए और पदक से वंचित रह गए।

इस रेस में मिल्खा सिंह को इस बात का तज्बुक था कि 1958 में  मिल्खा सिंह ने जिस एथलीट को हराया था अब उसी से वे रोम ओलंपिक खेल, 1960 में हार गए।

उन्हें इस असफलता का बहुत गहरा सदमा लगा और
वे अपनी इस असफलता को स्वीकारते हुए उन्होंने दौड़ से संन्यास लेना चाह लेकिन उनके फैन और कोच के बहुत समझने के बाद उन्होंने संन्यास नही लिया। और पुनः वापसी की।

इसके बाद सन 1962 में हुए जकार्ता में एशियाई खेलों में मिल्खा सिंह ने 400 Mt और 4×400 Mt रिले दौड़ में स्वर्ण पदक जीता। लेकिन उनके इस जीत की खुशी नही थी।

सन 1962 में ही पाकिस्तान के अब्दुल खालिक को हराया था इसके बाद पाकिस्तान के जनरल अयूब खान ने उन्हें (Flying Sikh Milkha Singh)उड़न सीख” का उपधि दी

मिल्खा सिंह के रिकॉर्ड्स

1. सन 1957 में मिल्खा सिंह 400 Mt की दौड़ का रिकॉर्ड अपने नाम किया था जिसमे उन्होंने 400 Mt कुल 47.5 Sec में दौड़कर किया था।

2.सन 1958 में जापान के टोक्यो में हुए एशियाई खेलों ने मिल्खा सिंह ने 400 Mt200 Mt के 2 रिकॉर्ड अपने नाम किये थे।

3. सन 1958 मे ही ब्रिटेन मे हुए कॉमनवेल्थ खेलो में इन्होंने स्वर्ण पदक जीता।

4.सन 1959 में मिल्खा सिंह की कामयाबी देखकर भारत सरकार ने इन्हें चौथे सर्वोच्च पुरूस्कार से नवाजा गया।

5.सन 1959 में हुए इंडोनेशिया में एशियाई खेलों में 400 mt की दौड़ में स्वर्ण पदक जीता।

6. सन 1960 में रोम ओलंपिक खेल, मे मिल्खा सिंह ने 400 मीटर की दौड़ में 40 साल का रिकॉर्ड तो तोड़ा था

7. सन 1962 में एक बार फिर मिल्खा सिंह एशियाई खेलों में ने स्वर्ण पदक जीतकर देश को गौरव प्रदान किया।

8. क्या आप जानते हैं, मिल्खा सिंह ने जो रोम ओलंपिक खेल, 1960 में जुते पहने थे उनकी नीलामी सन 2012 में  कि और एक चैरिटी संस्था को दे दिया।

9. 1 जुलाई 2012 को एक सर्वे के अनुसार उन्हें भारत का एक सफल धावक माना गया। जिन्होंने ओलम्पिक खेलो में 20 पदक अपने नाम किये ये एक बहुत बड़ा रिकॉर्ड हैं।

10. मिल्खा सिंह ने जो पदक जीते हैं, उन्होंने उन्हें देश के नाम कर दिया था, आपको बता दे पहले तो वे जवाहर नेहरू स्टेडियम में रखा गया था लेकिन बाद में उन्हें पटियाला के एक खेल म्यूजियम में रखा गया है।

मिल्खा सिंह के बारे में कुछ रोचक तथ्य Milkha Singh facts in hindi

1. मिल्खा सिंह भारत के एक प्रसिद्ध धावक हैं। इनका जन्म 20 नवम्बर 1929 को गोविंदपुर  (पाकिस्तान)  में हुआ था

2. इन्होंने रोम के 1960 ग्रीष्म ओलम्पिक खेलो तथा टोक्यो के 1964 ग्रीष्म ओलंपिक खेलों में अपने देश भारत का प्रतिनिधित्व किया था

3. मिल्खा सिंह अपने माँ बाप की पंद्रह संतानो में से एक थे।

4. मिल्खा सिंह ने 12 वर्ष की उम्र में अपने माता पिता को खो दिया था।

5. सन 1958 में के खेलों के अच्छे प्रदर्शन के कारण मिल्खा सिंह को Junior Commissioned Officer (JCO) के तौर पर प्रमोशन कर दिया इसके उपरांत मिल्खा सिंह जी को पंजाब के शिक्षा विभाग में खेल निदेशक के पड़ पर नियुक्त किये गए , इस पद से ये सन 1998 में रिटायर्ड हुए

6. मिल्खा सिंह इंडियन आर्मी में 3 बार रिजेक्ट हुए थे चौथी बार उनका चयन आर्मी में हुआ था

7.  मिल्खा सिंह ने एक बार बताया था कि ट्रैनिंग के दौरान मिल्खा सिंह को मुंह और पेशाब से खून तक आ जाता था अब आप सोच सकते हैं, मिल्खा सिंह ने कितनी कठिन मेहनत की होगी

Note – दोस्तो आपको मिल्खा सिंह की बायोग्राफी लेख कैसा लगा Comment करके जरूर बताएं और अगर इस लेख के बारे मे आपके मन मे कोई भी सवाल हो तो हमे Comment करके बताये और यदि आपके पास इस लेख से सबंधित कोई जानकारी हो तो हमे Mail कीजिये अगर आप इस लेख के बारे में हमे कोई सुझाव देना चाहते हो तो comment करके जरूर बताएं और इस लेख को अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करे

 

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